Tuesday, 18 October 2011

मेरी टिप्पणियां और लिंक -4

देवेन्द्र पाण्डेय 
करे आत्मा फिर हमें, अन्दर से बेचैन |
ढूंढ़ दूसरी लाइए, निकसे अटपट बैन |

निकसे अटपट बैन, कुकर की सीटी बाजी |
समझे झटपट सैन, वहीँ से बकता हाँजी |

गर रबिकर इक बार, कुकर का होय खात्मा |
परमात्मा - विलीन, करे - बेचैन - आत्मा ||

(2)
 पैसे  पर  बिकते  रहे, तभी  तो  है  यह  हाल |
मौज अन्य  करते  रहे,   पंडित  गुरू  दलाल |

पंडित  गुरू  दलाल,  पकड़  शादी  करवाए |
कहो  गुरू  क्या  हाल, पूछने  फिर  ना आए |

फींचा  जाता  रोज,  गजब  पटकाता   ऐसे |
बकरी वाला कथ्य,  हगे  मिमिया  के  पैसे ||





 noreply@blogger.com (Arvind Mishra) 


है भावना - भट-की, कसम से, अगर छेड़ा |
सचमुच खड़ा हो, जंग का नूतन बखेड़ा |
हैं कृष्ण - राधा की सगी सम्वेदनाएँ--
इस दर्द को मथुरा का मानो मधुर पेड़ा ||
 (1)
नश्वर है यह देह पर, भाव सदा चैतन्य |
शाश्वत हूँ साकार पर, चिरकांक्षित ना अन्य |
चिरकांक्षित ना अन्य, भटकती है अभिलाषा |
भटक रहा चहुँ ओर, पपीहा स्वाती प्यासा |
कह कृष्णा अकुलाय, भेंट कर राधे अवसर |
सुन राधा हम श्याम, नहीं हम - दोनों नश्वर ||

(2)
 राधा के दर्शन किये, पड़ी कलेजे ठण्ड |
मथुरा में आफत करे, कंस महा-बरबंड  |
कंस महा-बरबंड,  जो उद्धव गोकुल आये |
राधा हुई उदास, भला अब के समझाए |
जाय रहे रणछोड़, बड़ी  जीवन पर बाधा |
बढ़ी प्रीति को तोड़, छोड़ कर जाते राधा ||

 एक नए शोध की आवश्यकता है . शिखा कौशिक 
                           

भ्रष्टाचारी का सदा, धक्-धक् करे करेज |
जब तक मिले हराम की, करता नहीं गुरेज |

BS Yeddyurappa
करता नहीं गुरेज, सात पुश्तों की खातिर |
चाहे धन संचयन,  होय निर्मम दिल शातिर |
 
लेकिन  लोकायुक्त,  कराता  छापामारी |
होवे  दिल  में  दर्द,  मरे  वो  भ्रष्टाचारी  ||


  MERI SOCH


निकले अगर भडास तो, बढती जीवन साँस ||
आँसू बह जाएँ अगर,  कमे   दर्द-एहसास || 

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