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Tuesday, 13 September 2011

करता घंटा काम


घोडा  चाबै  घास-तृण, अजगर  लीलै जीव,
ढाई  घर  ये  नापता,  वो   लागै   निर्जीव |



वो  लागै निर्जीव, सरिस सरकारी अफसर,
करता घंटा काम, खाय पर सबकुछ भरकर |


कर उद्यम-सुविचार, जिओ चाहे कुछ थोडा, 
 अजगर सा पर नहीं, जिओ रे बनकर घोडा||


Vespucci Quarter Horse Fancy Raised Bridle



 Indian Python Snake: Indian Python Snake: Indian Python Snake: Indian ... 
कुंडली की पूंछ --
अजगर जीता सौ बरस, घोडा बाइस-बीस |
घोडा हरदम बीस है,  अजगर है उन्नीस ||

Tuesday, 12 July 2011

दूल्हा नहीं बनावत हमका

जबरे  बहुत  सतावत  हमका
उल्टा  रहे  सिखावत  हमका
माँ ! तुमसे डेर-वावत हमका--
इधर -उधर  दौरावत  हमका  ||
 

राज - पाट   से   होई  का ?
दूल्हा  नहीं  बनावत हमका |
एम पी  से  गए  भगाए  अपना 
यू पी  मा  भुगतावत हमका ||

Sunday, 10 July 2011

नैतिक शिक्षा

ram ram bhai पर मेरी  टिप्पणी 

जिम्मेदारी   के   लिए,  हो   जाओ  तैयार,  

बच्चों के प्रति है अगर, थोडा सा भी प्यार |

थोडा सा भी प्यार,  बड़ा  विश्वास जगाओ--
सबसे पहले स्वयं,  कठिन संयम अपनाओ |
है  जो  बात  जरुरी,  उसकी  करो  तैयारी |
नैतिक शिक्षा हुई ,   आज  की जिम्मेदारी ||


स्नेहमयी  स्पर्श  की, अपनी  इक  पहिचान,  
बुरी-नियत संपर्क का, चलो  दिलाते  ध्यान |
चलो  दिलाते  ध्यान, बताना   बहुत  जरुरी,
दिखे  भेड़  की  खाल, बना  के  रक्खे  दूरी |
करो   परीक्षण  स्वयं, बताओ सीधा रस्ता,
घर  आये   चुपचाप,  उठा के अपना बस्ता ||


पहली  कक्षा  में  सिखा, सेहत  के  सब  राज,
और  आठवीं  में  बता ,  सब  अंगों  के  काज |
सब  अंगों  के  काज,  मगर   विश्वास  जरुरी,
धीरे - धीरे    शांत,  करो     उत्सुकता     पूरी |
खतरे - रोग - निदान,  बताना  एक - एक  कर,
पशु-पिशाच  की  भीड़ , हमेशा  देख-रेख  कर ||


चंचल मन पर क्या कभी, चला किसी का जोर
हलकी  सी   बहती   हवा,   आग   लगाए   घोर |
आग    लगाए     घोर,   बचाना    चिंगारी    से,
पढना  लिखना  खेल,  सिखाओ  हुशियारी  से |
कह  रविकर  समझाए,  अगर  पढने  में  कच्चा,
रखिये   ज्यादा  ध्यान,  बिगड़  जाये  न  बच्चा ||




बच्चों को भी हो पता,  होवेगा  कब  व्याह,
रोजगार से लग चुका,  तब भी भरता आह |
तब भी भरता आह,   हुवा वो  पैंतिस  साला--
बढ़  जाते  हैं  चांस,  करे  न  मुँह  को काला |
सही समय पर व्याह,  कराओ  उसका  भाई,
इधर-उधर  हर-रोज  करे  न  कहीं  सगाई  ||

Saturday, 9 July 2011

सिंगार --

                   (1)
हर-सिंगार  बकवास है--
जिसपर ध्यान नहीं जाए |
बिन-सिंगार वो खास है--
अनायास  आकृष्ट  कराये ||  

                 (2)

इसी  गली  से  क्यूँ ?

तुम  गुजरते  हो  यूँ  

निर्लिप्त - निर्विकार  

कहो  तो  न  जियूं ||

                (3)

ओ प्रेम-दीवानी --
*बागर पर बैठी रानी !   * नदी के किनारे बेहद ऊंची जगह
बादल आये
बरसे 
प्रेम-जल बाढ़ा--
कई बन्ध टूटे
पर अब भी
जीवन नैया
मिलन को तरसे
तुम क्यूँ रूठे ?? 



Tuesday, 28 June 2011

रचना नहीं त्रासदी है

बरसात  आई 
कवि-हृदय 
लब-लबाया--
शब्द-सरिता
बह चली 
जाने-अनजाने रास्ते  ||

टपकती बूंदें 
बहता पानी 
भीगते लोग 
इन्द्र धनुष 
बिजली की चमक
बाढ़  की धमक
बादल की गरज 
मजे के वास्ते || 

पर है क्या बला 
बादल फटना ??
जरा हटना --
पूछता हूँ  रविकर से 
लिखे तो पक्तियां चार--
पर वो  तो-- 
बह गया यार ||
*        *         *        *        *
तूतुम -  तूतुम  वो हुआ,  तगड़ा तोता - चश्म |
गुड़   लेने   गुरूजी   गए,  पोती   सारी   भस्म |

पोती   सारी   भस्म,    पुजाता    लम्बी   पूजा |
खरबूजे   को   देख,   बदलता   रंग   खरबूजा |

कर रविकर अफ़सोस, बाप क्यूँ बैठा गुमसुम |
बना न अफसर किन्तु,  कमाता तूतुम तूतुम || 
           
तूतुम = जल्दी