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Monday, 5 September 2011

पहली कक्षा की शिक्षिका--

माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
अवगुण मेट गुणों को भरती |
टीचर का  एहसान बहुत है --
उनसे यह जिंदगी संवरती || 


माँ का  बच्चा हरदम अच्छा,
झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
ठोक-पीट कर या समझाकर-
बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


लगा  बाँधने  अपना कच्छा
कक्षा  दो  में  पहुंचा  बच्चा |
शैतानी  में   पारन्गत  हो
टीचर को दे जाता गच्चा ||


Monday, 27 June 2011

आत्म-चिंतन एवं उच्चारण पर टिप्पणी

किसको-किसको खुश करें, सारा जहाँ अजीब,
होते  वे  नाराज  जब,   "रब"  को  करूँ  करीब |
"रब"  को  करूँ  करीब,  बता  दो हमको रस्ता ,
दो   पाटन   के   बीच,  हो रही  हालत  खस्ता |
है रविकर यह  कठिन,  ख़ुशी दे पाना सबको'
हो  जाता  हूँ  फेल,  रखूं  खुश  कैसे  किसको || 

वेतन  भोगी  को  सदा,  प्यारी बड़ी  पगार |
कुछ रुपये गर कम हुए, पड़ती घर में झाड़ ||
पड़ती घर में झाड़,  बड़ा नाजुक है मसला |
होती कुछ बकवाद, हाथ से *मैटर फिसला ||  
दस दिन में सब खर्च, करे वो इसकी सौतन  |
मुहँ खोले फिर ठाढ़ , मांगती फिर से वेतन ||
*बहु-आयामी है यह मामला