Tuesday, 13 September 2011

मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह ||

खनन उपक्रम का, बेबस राजधर्म का
लूट-तंत्र बेशर्म का, सुवाद अंगूरी है |
राजपाट पाय-जात, धरती का खोद-खाद
लूट-लूट खूब खात, यही तो जरुरी है |
कहीं कांगरेस राज, भाजप का वही काज
छोट न आवत  बाज, भेड़-चाल पूरी है |
चट्टे-बट्टे थैली केर, सारे साले एक मेर,
देर है न है अंधेर,  आम मजबूरी है || 

 

देख सकने की,
जरा बकने की,
हंसीं सपने की,
तन्हा तपने की,
आदत है |
बुरी लत है ||


जब तक दुनिया है सखे, तब तक पत्थर राज |
पत्थर  से  टकराय  के,  लौटे   हर  आवाज  ||
लौटे   हर  आवाज,  लिखाये  किस्मत  लोढ़े,
कर्मों पर विश्वास, करे  क्या  किन्तु  निगोड़े ?
कोई  नहीं  हबीब,  मिला जो उसको अबतक,
जिए  पत्थरों  बीच, रहेगा जीवन जब तक ||

बड़ा प्रफुल्लित हो रहा, मिला शरद सा बाप |
मौज  करे  वो  ठाठ  से,  न  कोई  संताप ||
न   कोई    संताप ,  उडाये   आसमान  में,
मन  के  घोड़े  ख़ास, रहता  ख़ूब  गुमान  में ||
अब क्रिकेट का राज,  जभी रैना को पकड़ा,
सौंपेगा  साम्राज्य,  जोड़-जोड़  करता बड़ा ||

हिंदी की जय बोल |
मन की गांठे खोल ||

विश्व-हाट में शीघ्र-
बाजे बम-बम ढोल |

सरस-सरलतम-मधुरिम
जैसे चाहे तोल |

जो भी सीखे हिंदी-
घूमे वो भू-गोल |

उन्नति गर चाहे बन्दा-
ले जाये बिन मोल ||

हिंदी की जय बोल |
हिंदी की जय बोल |

सच्चाई की बात अजीब,
धूप - चांदनी पर खीज  |
तक़दीर फांके धूल-
उनको फूल सी चीज ||


भ्रूण में मारी हीर
है बड़ा बदतमीज |
खुशियाँ दी बेच
आँखे रही भीज ||


समझ की लाली
जिलाए रक्तबीज |
सहकर जुल्म हुआ
मुजरिम नाचीज || 

2 comments:

  1. सरस-सरलतम-मधुरिम
    जैसे चाहे तोल |

    जो सीखे हिंदी-
    घूमे वो भू-गोल |
    भारत माँ के माथे की बिंदी ,
    मेरी हिंदी ,
    बनी रहे सदैव , अंग्रेजी की भी कुंजी ।
    मेरी अभिव्यक्ति की संचित पुंजी।
    भाव जगत की हुंडी .
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति दी है आपने हिंदी उत्स पर .

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  2. वक्त की मंज़ूरी है ,इतनी सुन्दर टिप्पणियों पर लिखना बहुत ज़रूरी है ।
    कुंडलियों पर कुण्डलियाँ ,लिखना रविकर की मजबूरी है .
    बहुत ही सटीक टिपण्णी ,.....आभार !

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