Wednesday, 21 September 2011

मेरी टिप्पणियां और लिंक ||

पत्नी पीड़ित की व्यथा

दर्द से जब छटपटा कर,  आह  भरती है जुबाँ |
लगता है रविकर वाह सुनती हैं हमारी मेहरबाँ ||

चर्चित बाबा के चक्कर में..

चर्चित बाबा,
चंचल बाला |
शैतानों की
लगती खाला ||


प्रेम नजरजो
उसने डाला --


खतरे में है
कंठी माला ||


परचित बाबा
खोलो  ताला |


नया ज़माना
खुद को ढाला |


आन्नद ही आन्नद :- योजना आयोग ने करोडो भारतीयों को तत्काल अमीर बना दिया.



जंगल में चलकर रहो, सूखी  टहनी  बीन |
चावल दो मुट्ठी भरो, कर लो झट नमकीन |

कर लो झट नमकीन, माड़ से भरो कटोरा |
माड़ - भात परसाय, खिलाऊ  छोरी-छोरा |

डब्लू एच ओ जाय, बता दो सब कुछ मंगल |
चार साल के बाद, यही तो होइहैं नक्सल ||


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बत्तीसी दिखलाय के, पच्चीस कमवाय के

आयोग आगे आय के, खूब हलफाते हैं |

दवा दारु नेचर से, कपडे  फटीचर  से

मुफ्तखोर टीचर से,  बच्चा पढवाते  हैं |

सेहत शिक्षा मिलगै , कपडा लत्ता सिलगै

तनिक छत हिलगै,  काहे घबराते हैं ?


गरीबी हटाओ बोल, इंदिरा भी गईं डोल,

सरकारी झोल-झाल, गरीब मिटाते हैं ||

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