Monday, 5 September 2011

पहली कक्षा की शिक्षिका--

माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
अवगुण मेट गुणों को भरती |
टीचर का  एहसान बहुत है --
उनसे यह जिंदगी संवरती || 


माँ का  बच्चा हरदम अच्छा,
झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
ठोक-पीट कर या समझाकर-
बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


लगा  बाँधने  अपना कच्छा
कक्षा  दो  में  पहुंचा  बच्चा |
शैतानी  में   पारन्गत  हो
टीचर को दे जाता गच्चा ||


2 comments:

  1. माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
    अवगुण मेट गुणों को भरती |
    टीचर का एहसान बहुत है --
    उनसे यह जिंदगी संवरती || सुन्दर भाव !हकीकत यही है .प्राथमिक शाला की शिक्षिकाएं बड़ा काम करतीं हैं .बड़ी मेहनत करतीं हैं .

    राजनीति में प्रदूषण पर्व है ये पर्युषण पर्व नहीं .

    कबीरा खडा़ बाज़ार में

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