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Tuesday, 25 October 2011

मेरी त्वरित टिप्पणियां और लिंक -5


तन्मात्रा हो हे सखी, शब्द, रूप, रस, गन्ध |
सस्पर्श पञ्च-भूतियाँ, सांख्य-मत से बन्ध ||

कार्य में अपने हे सखी, रहो सदा लवलीन |
तन्नी नित खुरचा करे, मन-पट हुई मलीन ||


 हरिगीतिका छंद 
भारतीय नारी  
बड़े-बुजुर्गों से मिले, व्यवहारिक सन्देश |
पालन मन से जो करे, पावे मान विशेष ||

Tuesday, 18 October 2011

मेरी टिप्पणियां और लिंक -4

देवेन्द्र पाण्डेय 
करे आत्मा फिर हमें, अन्दर से बेचैन |
ढूंढ़ दूसरी लाइए, निकसे अटपट बैन |

निकसे अटपट बैन, कुकर की सीटी बाजी |
समझे झटपट सैन, वहीँ से बकता हाँजी |

गर रबिकर इक बार, कुकर का होय खात्मा |
परमात्मा - विलीन, करे - बेचैन - आत्मा ||

(2)
 पैसे  पर  बिकते  रहे, तभी  तो  है  यह  हाल |
मौज अन्य  करते  रहे,   पंडित  गुरू  दलाल |

पंडित  गुरू  दलाल,  पकड़  शादी  करवाए |
कहो  गुरू  क्या  हाल, पूछने  फिर  ना आए |

फींचा  जाता  रोज,  गजब  पटकाता   ऐसे |
बकरी वाला कथ्य,  हगे  मिमिया  के  पैसे ||





 noreply@blogger.com (Arvind Mishra) 


है भावना - भट-की, कसम से, अगर छेड़ा |
सचमुच खड़ा हो, जंग का नूतन बखेड़ा |
हैं कृष्ण - राधा की सगी सम्वेदनाएँ--
इस दर्द को मथुरा का मानो मधुर पेड़ा ||
 (1)
नश्वर है यह देह पर, भाव सदा चैतन्य |
शाश्वत हूँ साकार पर, चिरकांक्षित ना अन्य |
चिरकांक्षित ना अन्य, भटकती है अभिलाषा |
भटक रहा चहुँ ओर, पपीहा स्वाती प्यासा |
कह कृष्णा अकुलाय, भेंट कर राधे अवसर |
सुन राधा हम श्याम, नहीं हम - दोनों नश्वर ||

(2)
 राधा के दर्शन किये, पड़ी कलेजे ठण्ड |
मथुरा में आफत करे, कंस महा-बरबंड  |
कंस महा-बरबंड,  जो उद्धव गोकुल आये |
राधा हुई उदास, भला अब के समझाए |
जाय रहे रणछोड़, बड़ी  जीवन पर बाधा |
बढ़ी प्रीति को तोड़, छोड़ कर जाते राधा ||

 एक नए शोध की आवश्यकता है . शिखा कौशिक 
                           

भ्रष्टाचारी का सदा, धक्-धक् करे करेज |
जब तक मिले हराम की, करता नहीं गुरेज |

BS Yeddyurappa
करता नहीं गुरेज, सात पुश्तों की खातिर |
चाहे धन संचयन,  होय निर्मम दिल शातिर |
 
लेकिन  लोकायुक्त,  कराता  छापामारी |
होवे  दिल  में  दर्द,  मरे  वो  भ्रष्टाचारी  ||


  MERI SOCH


निकले अगर भडास तो, बढती जीवन साँस ||
आँसू बह जाएँ अगर,  कमे   दर्द-एहसास || 

Monday, 3 October 2011

मेरी टिप्पणियां और लिंक -3

बाद मरने के मेरे

मर-मर के जी रहे हैं सालों से मित्र हम तो-
वो मौत क्या अलहदा कुछ और कष्ट देगी ||
जब आग में जलेगा, नब्बे किलो का लोथा-
पानी-पवन गगन यह धरती भी अंश लेगी ||
मोबाइल हुआ जो स्थिर, तेरह दिनों तक देखा --
तो फोन का वो गाना फिर ना सुनाई देंगा |
जो काल ना करेगी, वो काल वो करेगा --
बस ब्लॉग जो ये छूटे, सच की रुलाई देगा |
नम्बर मिटेगा खुद से, पहले मिटें तो यादें,
वो मौत फिर न मौका, करने विदाई देगा ||

नरक  बनाने  में  जुटे,  सारे  आमो-ख़ास |
नोच-नोच के खा रहे, खोकर होश-हवाश |
खोकर होश-हवाश, हवश के  भूखे बन्दे |
ढोते खुद की लाश, रहे  गन्दे  के  गन्दे |
लाएगा के स्वर्ग, स्वर्ग के जानो माने |
सन्तति का आधार, लगे क्यूँ नरक बनाने ||

 

 

मैं छह महीने पुराना हो गया...




  • महेंद्र  श्रीवास्तव 






  • आधा सच कह-कह किया, आधा साल अतीत |
    पूरा कहने से बचा, समझे आधा मीत |

    आधा समझे मीत, समझदारी है जिनमें |
    "समझदार की मौत", हुई न इतने दिन में |

    बहुत ही खुशनसीब, तीर जिनपर भी साधा |
    "जो मारे सो मीर", कहा फिर से सच आधा || 

      विजय माथुर  
    क्रांति स्वर..... 
    बंदरों ने छीनकर, जीवन चलाया |
    हाथों को काम में कैसा फंसाया ?
    आँख, मुंह, कान  का चक्कर अजीब --
    मर न जाएँ भूख से बन्दर गरीब ||

    Saturday, 1 October 2011

    मेरी टिप्पणियां और लिंक-2

    आज अपने गिरेबान में झांक कर देखें- अज़ीज़ बर्नी

    खरी-खरी बातें कहीं, जज्बे को आदाब |
    स्वार्थी तत्वों को सदा, देते रहो जवाब ||

    बड़ी कठिन यह राह है,  संभल के चलिए राह |
    अपने  ही  दुश्मन  बने,  पचती  नहीं  सलाह ||

    भले नागरिक वतन को, करते हैं खुशहाल |
    बुरे   हमेशा   चाहते,  दंगे   क़त्ल    बवाल ||



    जीवनसंगिनी..........

    खूबसूरत ||
    हो तुम ||
    मेरी नजरों ने कहा |
    जरूरत हो तुम-
    जिगर के टुकड़ों ने कहा |
    सम्पूरक हो तुम ||
    अधरों ने कहा ||
    बेहतर हो तुम |
    मंदिर की मूरत ने कहा ||

    Sunday, 25 September 2011

    मेरी टिप्पणियां और लिंक ||

    चर्चा -मंच 

    श्रम - सीकर अनमोल है,  चुका सकें न मोल |
    नत - मस्तक गुरुदेव है,  सारा यह भू-गोल ||


    मन और झील कभी नहीं भरती

    मन-का  मनमथ-मनचला, मनका पावै ढेर |
    मनसायन वो झील ही,  करती रती  कुबेर |

    करती रती  कुबेर,  झील  लब-लबा  उठी  है |
    हुई  नहीं  अंधेर,  नायिका  सुगढ़  सुठी  है |

    दीपक  की बकवाद, सुना  तो  माथा  ठनका |
    कीचड़ सा उपमान,  रोप कर  तोडा  मनका ||

    कभी-कभी....



    ध्वनन,
    ध्वन और ध्वन्य से 
    प्रभावी अव्यक्ति |
    ध्वंसक के लिए असहनीय
    मौनित्व की शक्ति ||

    ध्वनन=अव्यक्त शब्द
    ध्वन= शब्द
    ध्वन्य=व्यंगार्थ 


    कालू गरीब हाजिर हो- 

    अष्टावक्र


    थर्ड-क्लास को ट्रेन से, हटा चुके थे लोग |
    फोर्थ क्लास भुखमरी का, मिटा श्रेष्ठ संजोग ||


    अब लास्ट क्लास थर्ड क्लास ||
    भुखमरी ही आज के सरकार की गरीबी है |

    जय सम्मोहन जय मनमोहन
    जय नग्नोहन जय रक्त्दोहन ||

    Wednesday, 21 September 2011

    मेरी टिप्पणियां और लिंक ||

    पत्नी पीड़ित की व्यथा

    दर्द से जब छटपटा कर,  आह  भरती है जुबाँ |
    लगता है रविकर वाह सुनती हैं हमारी मेहरबाँ ||

    चर्चित बाबा के चक्कर में..

    चर्चित बाबा,
    चंचल बाला |
    शैतानों की
    लगती खाला ||


    प्रेम नजरजो
    उसने डाला --


    खतरे में है
    कंठी माला ||


    परचित बाबा
    खोलो  ताला |


    नया ज़माना
    खुद को ढाला |


    आन्नद ही आन्नद :- योजना आयोग ने करोडो भारतीयों को तत्काल अमीर बना दिया.



    जंगल में चलकर रहो, सूखी  टहनी  बीन |
    चावल दो मुट्ठी भरो, कर लो झट नमकीन |

    कर लो झट नमकीन, माड़ से भरो कटोरा |
    माड़ - भात परसाय, खिलाऊ  छोरी-छोरा |

    डब्लू एच ओ जाय, बता दो सब कुछ मंगल |
    चार साल के बाद, यही तो होइहैं नक्सल ||


     8888888888888888888888888888888

    बत्तीसी दिखलाय के, पच्चीस कमवाय के

    आयोग आगे आय के, खूब हलफाते हैं |

    दवा दारु नेचर से, कपडे  फटीचर  से

    मुफ्तखोर टीचर से,  बच्चा पढवाते  हैं |

    सेहत शिक्षा मिलगै , कपडा लत्ता सिलगै

    तनिक छत हिलगै,  काहे घबराते हैं ?


    गरीबी हटाओ बोल, इंदिरा भी गईं डोल,

    सरकारी झोल-झाल, गरीब मिटाते हैं ||

    Monday, 19 September 2011

    मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह -4

    "मुक़द्दस टोपी"





    (१)
    मोदी  टोपी  पहनते, क्या खो  जाता तोर ??
    सेक्युलर का काला हृदय, खिट-पिट करता और |


    खिट-पिट करता और, उतरती  उनकी टोपी |
    वोट  बैंक  की  नीत,   बघेला   बेहद   कोपी |


    कटते हिन्दू वोट, देख कर हरकत भोंदी |

    घंटा  बढ़ते  और, समर्थक  मुस्लिम  मोदी ||
    (२)
    कट्टर हिन्दू-मुसल्मा, हैं औरन से नीक |
    इंसानियत उसूल है, नहीं छोड़ते लीक |
    नहीं छोड़ते लीक, नहीं थाली के बैगन |
    लुढ़क गए उस ओर, जिधर जो जमते जन-गन |
    मोदी तुझे सलाम, कहीं न तेरा टक्कर |
     मूरत अस्वीकार, करे मुस्लिम भी कट्टर ||
    (3)
    पहन मुक़द्दस टोपियाँ, बड़ी-बड़ी सरकार |
    लालू शरद मुलायमी, काँग्रेस - आधार |

    काँग्रेस - आधार , पहन कर टोपी सुन्दर |
    बेडा अपना पार, करें ये मस्त कलन्दर |

    पर मौलाना सोच, बड़े ये भारी सरकस |
    कितना की उपकार, टोपियाँ पहन मुक़द्दस ||

    'मेरी गुड़िया' -डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
    पढना लिखना तनिक न आये |
    गुड़िया  तो  बुढ़िया  हो  जाए ||
    जायेगी ससुराल सास को --
    पढना लिखना कौन सिखाये ??
    सीख फटाफट ए बी सी डी-
    गिनती-टेबुल  जोड़  घटाए--
    नीति नियम गुरुजन का आदर-
    ज्ञान पाय विज्ञान पढाये ||
    कम्पूटर इंटरनेट ब्लोगिंग-
    दुनिया को सद-राह दिखाए ||
    भोली गुड़िया प्यारी गुड़िया
    प्यारी बन सबको हरसाए ||

     

    न जाओ सैंया,छुड़ा के बैंया !

    दीपक  बाबा  हैं  सखे, काहे  चिंता  खाय |
    लोग  टिप्पणी  छानते, करकट रहे बराय |

    करकट  रहे  बराय, उन्हीं  की  मर्जी  बाबू,
    मनमाफिक तो ठीक, नहीं तो करते काबू |

    तब भी दिल की चोट, करे बेमतलब बक-बक |
    अन्तर कर उजियार, जलाते रहिये दीपक ||

    Saturday, 17 September 2011

    मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह ||

    काश यूँ होता....
    बाला बड़ी बहादुर है, बस बही भावना में थोड़ी |
    बालक बरताव बनाए रख, बाला है सोणी-सोणी |

    दुनिया बेशक अच्छी है, बस बदल नजरिया उसका तू-
    कुछ सामंजस स्थापित कर, बदले वो थोड़ी -मोड़ी ||



    जीवन भी संघर्ष एक, तू राह उसे दिखलाता जा --
    सुगम रास्ता पाएगी, पर मिलेंगे कुछ रोड़ा -रोड़ी ||

    दूजे का व्यवहार क्रूर, उसकी चिंता से होगा क्या --
    बस दूर रहे, खुशहाल रहे, क्यूँ  करती सर फोड़ा-फोड़ी ||


    बहाना है उपवास, मंजिल पीएम निवास

    उपवास का सुवास हो, और अधिक पास हो,
    आस भरा विश्वास हो, दंगा वह भूलिए |

    भागलपुर भागते, देहली दहलात के ??
    घात पे प्रतिघात के, पाप पूरे धो लिए ??

    अंगुलिमाल-वाल्मीकि, भूलो मत यह सीख
    गांधीजी की क्षमा नीति, घोलकर पी लिये |

    प्रयास का उपहास, कांगरेस है निराश
    गिरेबान देख झांक, चौरासी भी खोलिए ||

     काका हाथरसी 

    काकी पर चलते रहे, काका की शमशीर |
    बेलन से पिटते रहे,  खाई फिर  भी खीर |

    खाई फिर भी खीर, तीर काकी के आकर|
    बने कलम के वीर, धरा पूरी महका  कर | 

    पर  रविकर इक बात, रही बाँकी  की बाकी |

    मिली कहाँ से तात, आपको ऐसी काकी ||

     

    मत दो जीवन का वरदान....

    यह मत दो तुम, वो भी मत दो |
    आखिर क्या  मांगे दीवाने ?
    मेरा प्यार नहीं क्यूँ मांगे--
    चाहे - बस - दर्दीले - गाने ||

    तनिक शरारत थोडा नखरा
    थोड़ी मस्ती बुरा मानता -
    आखिर प्यार किसे कहते हैं--
    प्यार के आखिर क्या हैं माने ||

    (चर्चा मंच-641)

    करें  संकलन  प्रेम से, देते  मंच  सजाय |
    उत्तम  चर्चा  आपकी, शारद सदा सहाय ||
    शारद सदा सहाय, प्रकृति प्रेमी ये गुरुवर,
    माला पुष्प बनाय, लगाके  रक्खे तरुवर ||
    प्रभु जी करिए कृपा, बनाए रखिये साया,
    स्वस्थ और सानंद, रहे गुरुवर की काया |

    जन्म-दिन मुबारक 

    सन्नी-सन सन सा संवर, सन-सन सुखद सुनील |
    सरवन सम सुत समुन्नति, सामृद्धि-सम्मति-शील ||

    सामृद्धि-सम्मति-शील, बधाई जन्म दिवस की |
    पल पल आगे बढ़ो, फेस पर हरदम मुस्की ||

    दे रविकर आशीष, मिले संस्कारी बन्नी ||
    मात-पिता को हर्ष, ख़ुशी खुब पावे सन्नी ||

    Friday, 16 September 2011

    मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह ||

    ख़ुशी का मन्त्र है यारो, 
    नहीं रोना न शर्मिंदा |
    बुरी बातों को भूलो जी, 
    रहो बिंदास फिर जिन्दा |


    बढे पेट्रोल सब्जी दुग्ध, 
    राशन बम इलेक्ट्रिक बिल-
    पुरानी दुश्मनी भूलो, 
    रखो न याद आइन्दा 

    888888888888888888888888888888888

    जीवन में जो कुछ घटा, उचित अवधि के बाद,
    गलत-सही  का आकलन, कर  पाए  उस्ताद |

    कर   पाए   उस्ताद,  बाप  गलती  पर   डांटे,
    तीस वर्ष का  कर्म,  आज  खुद  खाय  गुलाटे |

    मारा  नाथू-राम,  नहीं  तो  करते  अनशन ,
    बना दिया   ना-पाक,  कोसते अपना  जीवन ||

    888888888888888888888888888888888

    जिसकी लाठी भैंस उसी की, बड़ी कहावत |
    यह अपनी सरकार, नए हद स्वयं बनावत ||

    किसे पता कब जाय, सौंप देंगे वो हिस्सा |
    याद नहीं क्या मित्र, बांग्ला-ताजा किस्सा ||

    बना रहे सम्मान देश का,  सही करो अब नीत |
    चीन-पाक अमरीका तक, भय बिन करिहैं प्रीत ||

    Tuesday, 13 September 2011

    मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह ||

    खनन उपक्रम का, बेबस राजधर्म का
    लूट-तंत्र बेशर्म का, सुवाद अंगूरी है |
    राजपाट पाय-जात, धरती का खोद-खाद
    लूट-लूट खूब खात, यही तो जरुरी है |
    कहीं कांगरेस राज, भाजप का वही काज
    छोट न आवत  बाज, भेड़-चाल पूरी है |
    चट्टे-बट्टे थैली केर, सारे साले एक मेर,
    देर है न है अंधेर,  आम मजबूरी है || 

     

    देख सकने की,
    जरा बकने की,
    हंसीं सपने की,
    तन्हा तपने की,
    आदत है |
    बुरी लत है ||


    जब तक दुनिया है सखे, तब तक पत्थर राज |
    पत्थर  से  टकराय  के,  लौटे   हर  आवाज  ||
    लौटे   हर  आवाज,  लिखाये  किस्मत  लोढ़े,
    कर्मों पर विश्वास, करे  क्या  किन्तु  निगोड़े ?
    कोई  नहीं  हबीब,  मिला जो उसको अबतक,
    जिए  पत्थरों  बीच, रहेगा जीवन जब तक ||

    बड़ा प्रफुल्लित हो रहा, मिला शरद सा बाप |
    मौज  करे  वो  ठाठ  से,  न  कोई  संताप ||
    न   कोई    संताप ,  उडाये   आसमान  में,
    मन  के  घोड़े  ख़ास, रहता  ख़ूब  गुमान  में ||
    अब क्रिकेट का राज,  जभी रैना को पकड़ा,
    सौंपेगा  साम्राज्य,  जोड़-जोड़  करता बड़ा ||

    हिंदी की जय बोल |
    मन की गांठे खोल ||

    विश्व-हाट में शीघ्र-
    बाजे बम-बम ढोल |

    सरस-सरलतम-मधुरिम
    जैसे चाहे तोल |

    जो भी सीखे हिंदी-
    घूमे वो भू-गोल |

    उन्नति गर चाहे बन्दा-
    ले जाये बिन मोल ||

    हिंदी की जय बोल |
    हिंदी की जय बोल |

    सच्चाई की बात अजीब,
    धूप - चांदनी पर खीज  |
    तक़दीर फांके धूल-
    उनको फूल सी चीज ||


    भ्रूण में मारी हीर
    है बड़ा बदतमीज |
    खुशियाँ दी बेच
    आँखे रही भीज ||


    समझ की लाली
    जिलाए रक्तबीज |
    सहकर जुल्म हुआ
    मुजरिम नाचीज ||