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Friday, 16 September 2011

मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह ||

ख़ुशी का मन्त्र है यारो, 
नहीं रोना न शर्मिंदा |
बुरी बातों को भूलो जी, 
रहो बिंदास फिर जिन्दा |


बढे पेट्रोल सब्जी दुग्ध, 
राशन बम इलेक्ट्रिक बिल-
पुरानी दुश्मनी भूलो, 
रखो न याद आइन्दा 

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जीवन में जो कुछ घटा, उचित अवधि के बाद,
गलत-सही  का आकलन, कर  पाए  उस्ताद |

कर   पाए   उस्ताद,  बाप  गलती  पर   डांटे,
तीस वर्ष का  कर्म,  आज  खुद  खाय  गुलाटे |

मारा  नाथू-राम,  नहीं  तो  करते  अनशन ,
बना दिया   ना-पाक,  कोसते अपना  जीवन ||

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जिसकी लाठी भैंस उसी की, बड़ी कहावत |
यह अपनी सरकार, नए हद स्वयं बनावत ||

किसे पता कब जाय, सौंप देंगे वो हिस्सा |
याद नहीं क्या मित्र, बांग्ला-ताजा किस्सा ||

बना रहे सम्मान देश का,  सही करो अब नीत |
चीन-पाक अमरीका तक, भय बिन करिहैं प्रीत ||

Tuesday, 13 September 2011

मेरी टिप्पणियां -- इस सप्ताह ||

खनन उपक्रम का, बेबस राजधर्म का
लूट-तंत्र बेशर्म का, सुवाद अंगूरी है |
राजपाट पाय-जात, धरती का खोद-खाद
लूट-लूट खूब खात, यही तो जरुरी है |
कहीं कांगरेस राज, भाजप का वही काज
छोट न आवत  बाज, भेड़-चाल पूरी है |
चट्टे-बट्टे थैली केर, सारे साले एक मेर,
देर है न है अंधेर,  आम मजबूरी है || 

 

देख सकने की,
जरा बकने की,
हंसीं सपने की,
तन्हा तपने की,
आदत है |
बुरी लत है ||


जब तक दुनिया है सखे, तब तक पत्थर राज |
पत्थर  से  टकराय  के,  लौटे   हर  आवाज  ||
लौटे   हर  आवाज,  लिखाये  किस्मत  लोढ़े,
कर्मों पर विश्वास, करे  क्या  किन्तु  निगोड़े ?
कोई  नहीं  हबीब,  मिला जो उसको अबतक,
जिए  पत्थरों  बीच, रहेगा जीवन जब तक ||

बड़ा प्रफुल्लित हो रहा, मिला शरद सा बाप |
मौज  करे  वो  ठाठ  से,  न  कोई  संताप ||
न   कोई    संताप ,  उडाये   आसमान  में,
मन  के  घोड़े  ख़ास, रहता  ख़ूब  गुमान  में ||
अब क्रिकेट का राज,  जभी रैना को पकड़ा,
सौंपेगा  साम्राज्य,  जोड़-जोड़  करता बड़ा ||

हिंदी की जय बोल |
मन की गांठे खोल ||

विश्व-हाट में शीघ्र-
बाजे बम-बम ढोल |

सरस-सरलतम-मधुरिम
जैसे चाहे तोल |

जो भी सीखे हिंदी-
घूमे वो भू-गोल |

उन्नति गर चाहे बन्दा-
ले जाये बिन मोल ||

हिंदी की जय बोल |
हिंदी की जय बोल |

सच्चाई की बात अजीब,
धूप - चांदनी पर खीज  |
तक़दीर फांके धूल-
उनको फूल सी चीज ||


भ्रूण में मारी हीर
है बड़ा बदतमीज |
खुशियाँ दी बेच
आँखे रही भीज ||


समझ की लाली
जिलाए रक्तबीज |
सहकर जुल्म हुआ
मुजरिम नाचीज || 

करता घंटा काम


घोडा  चाबै  घास-तृण, अजगर  लीलै जीव,
ढाई  घर  ये  नापता,  वो   लागै   निर्जीव |



वो  लागै निर्जीव, सरिस सरकारी अफसर,
करता घंटा काम, खाय पर सबकुछ भरकर |


कर उद्यम-सुविचार, जिओ चाहे कुछ थोडा, 
 अजगर सा पर नहीं, जिओ रे बनकर घोडा||


Vespucci Quarter Horse Fancy Raised Bridle



 Indian Python Snake: Indian Python Snake: Indian Python Snake: Indian ... 
कुंडली की पूंछ --
अजगर जीता सौ बरस, घोडा बाइस-बीस |
घोडा हरदम बीस है,  अजगर है उन्नीस ||

Thursday, 8 September 2011

चर्चा-मंच की प्रस्तावना

  बड़ी अदालत  था  गया, खुदा का बंदा एक,  
 कातिल को फांसी मिले,  मारा   बेटा  नेक |  

मारा  बेटा  नेक, हुआ  आतंकी  हमला ,
कातिल मरणासन्न, भूलते अब्बू बदला |

जज्बा तुझे सलाम, जतन से शत्रु  संभालत,
                        मानो  करते  माफ़, खुदा की बड़ी अदालत |               
                                        
(जनता आतंकी हमलों की आदी हो चुकी है)
 -सुबोधकांत सहाय
संसद की अवमानना, मचती खुब चिल्ल-पों, 
 जनता  की  अवमानना, करते  रहते  क्यों ?

करते  रहते  क्यो, हमेशा  मंत्रि-कबीना |
 जीने का अधिकार, आम-जनता से छीना ?

सत्ता-मद  में  चूर,  बढ़ी  बेशरमी  बेहद,
आतंकी फिर कहीं,  उड़ा  न  जाएँ  संसद |

Tuesday, 6 September 2011

हाथ छुड़ा के -- फिर घर चलना |


माँ का ललना |
झूले पलना ||

समय समय पर  
दूध पिलाती |
जीवन खातिर-
हाड़ गलाती |
दीप शिखा सी 
हर-पल जलना ||
माँ का ललना |
झूले पलना ||


आयु  बढती--
ताकत घटती |
पति-पुत्र में -
बंटती-मिटती |
आज बिकल है -
कल भी कल-ना ||
माँ का ललना |
झूले पलना ||


आया रिश्ता- 
बेटा बिकता |
धीरे-धीरे--
माँ से उकता |
होती परबस-
डरना-मरना ||
माँ का ललना |
झूले पलना ||


हो एकाकी ,
साँसे बाकी |
पोते-पोती 
बनती जोती |
हाथ छुड़ा के  --
फिर घर चलना ||
माँ का ललना |
झूले पलना ||

Monday, 5 September 2011

पहली कक्षा की शिक्षिका--

माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
अवगुण मेट गुणों को भरती |
टीचर का  एहसान बहुत है --
उनसे यह जिंदगी संवरती || 


माँ का  बच्चा हरदम अच्छा,
झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
ठोक-पीट कर या समझाकर-
बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


लगा  बाँधने  अपना कच्छा
कक्षा  दो  में  पहुंचा  बच्चा |
शैतानी  में   पारन्गत  हो
टीचर को दे जाता गच्चा ||


Monday, 29 August 2011


शुभ-विदाई 
प्रोफ़ेसर बी एस आर शास्त्री
(सेवा-निवृत्त 31 अगस्त 2011)
Department of Electronics Engineering
INDIAN SCHOOL OF MINES 
धनबाद, झारखण्ड
 
                        (कुण्डली)
सेवा उनतिस वर्ष  की, चले छोड़ धनबाद,
बच्चों ढिग जाकर रहें, सदा मिले संवाद |

सदा मिले संवाद, खिलायें  नाती-पोते,
बन दोनों कुल-सूत्र, सीप-मोतियाँ पिरोते

जोड़ी  पर  पुरजोर, कृपाकर गणपति देवा,
रहें स्वस्थ सानन्द, सदा शुभ पावैं सेवा ||

 (घनाक्षरी) 
जीरो एण्ड वन  बीच, डिजिटल से वर्ल्ड के 
बाइनरी नम्बर में, मार्गन्स-डी रोल है |

 बरबस स्टुडेंट की, बुद्धि होय फ्लिप-फ्लॉप 
पढ़े  अकलमंद  हो,  घूमता भू-गोल  है |

एनालाग-सिग्नल भी, माड्यूलेट होत-जात 
जीवन  में शानदार,  बनता कन्ट्रोल  है |

माइक्रो-प्रोसेसर का, इन्टरफेस मस्त है
 दुनिया की खातिर ये, शास्त्री अनमोल है |
dcgpthravikar.blogspot.com  dineshkidillagi.blogspot.com    neemnimbouri.blogspot.com